कुरान - 2:15 सूरह अल-बक़रा अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

ٱللَّهُ يَسۡتَهۡزِئُ بِهِمۡ وَيَمُدُّهُمۡ فِي طُغۡيَٰنِهِمۡ يَعۡمَهُونَ

अनुवाद -

15. अल्लाह उनका मज़ाक उड़ाता है [30] और उन्हें उनकी सरकशी में भटकने के लिए छोड़ देता है [31]।

सूरह अल-बक़रा आयत 15 तफ़सीर


[30] मुनाफ़िक़ों के मज़ाक का इलाही जवाब

अल्लाह उनके मज़ाक का बदला सज़ा देकर देता है।
इस्लाम की इज़्ज़त को गिराने की इनकी कोशिश का नतीजा — अल्लाह का साफ़ और सख़्त इंतेक़ाम (बदला) — इस आयत में बयान हुआ है।

[31] मुनाफ़िक़ों के दोहरे मापदंड और उनका अंजाम

इस आयत में उन लोगों को बेनक़ाब किया गया है जो हालात के हिसाब से दोहरा चेहरा रखते हैं — जब फ़ायदा हो, तो मुसलमानों के साथ दिखते हैं, लेकिन जब काफ़िरों (धनवान या असरदार) के बीच होते हैं, तो उनका साथ देते हैं।

✅ 31.1 कुफ्र पसंद लोगों की सोहबत से मुनाफ़िक़त पैदा होती है

अक्सर गैर-ईमान वालों की सोहबत (संगत), ख़ासतौर पर उनकी तारीफ़ या झुकाव की वजह से, दिल में मुनाफ़िक़त (दोमुंही) पैदा होती है।

✅ 31.2 मोमिनों को सुकून मिलता है, मुनाफ़िक़ भटकते हैं

अल्लाह मोमिनों को सुकून, समझ और सफ़ाई देता है, लेकिन मुनाफ़िक़ उलझे रहते हैं —
रूहानी अंधेरे (spiritual darkness) और भीतरी टकराव (internal conflict) में भटकते रहते हैं।

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