18. वे बहरे हैं, गूंगे हैं, अंधे हैं, इसलिए वे लौटकर नहीं आएंगे [34]।
इस आयत में बताया गया है कि जो लोग अल्लाह की निशानियों को नजरअंदाज़ करते हैं,
वो ऐसे हैं जैसे अंधे,
जो लोग क़ुरआन नहीं सुनते,
वो जैसे बहरे,
और जो लोग अल्लाह की तस्बीह नहीं करते और नबी ﷺ की तारीफ़ नहीं करते,
वो जैसे गूंगे।
👉 ये तमाम इंद्रियाँ (सुनना, बोलना, देखना) अल्लाह की याद के लिए बनाई गई थीं — लेकिन जब इनका गलत इस्तेमाल होता है, तो ये बेकार हो जाती हैं।
👉 ऐसे लोग रूहानी तौर पर मुर्दा हो जाते हैं, जबकि शहीदों को असल ज़िंदा कहा गया है।
👉 और यह भी इशारा है कि नबी ﷺ के सहाबा के दुश्मन इतने गुमराह हैं कि हिदायत की तरफ़ लौटना नामुमकिन हो जाता है —
क्योंकि अल्लाह फ़रमाता है:
"तो वे लौटकर नहीं आएंगे।" (सूरह 2:18)
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सूरह अल-बक़रा आयत 18 तफ़सीर