250):
"और जब वे जलूत और उसकी सेनाओं से सामना करने के लिए पहुंचे, तो उन्होंने कहा: 'हे हमारे रब! हम पर धैर्य (सबर) डाले और हमारे क़दमों को मज़बूत रख, और हमें काफ़िरों के खिलाफ़ मदद दे।'" [634]
निष्कर्ष:
यह आयत हमें यह सिखाती है कि सच्चा साहस और दृढ़ता केवल शारीरिक बल से नहीं बल्कि धैर्य, ईश्वर के प्रति विश्वास, और आध्यात्मिक सहनशीलता से आता है। संघर्ष के समय, हमें ईश्वर की सहायता के लिए दुआ करनी चाहिए और उसके मार्गदर्शन पर भरोसा रखना चाहिए।
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सूरह अल-बक़रा आयत 250 तफ़सीर