[79] तो तबाही है उन लोगों के लिए जो किताब को अपने हाथों से लिखते हैं और फिर कहते हैं: "यह अल्लाह की तरफ़ से है" [140], ताकि इसके ज़रिये कुछ फायदा उठा सकें [141]। तो तबाही है उनके लिए, उस चीज़ की वजह से जो उनके हाथों ने लिखी, और तबाही है उनके लिए उस कमाई की वजह से [142]।
अपने मतलब के लिए अल्लाह की बातों को बदलना:
यह आयत उन यहूदी आलिमों की आलोचना करती है जो किताबे मुक़द्दस (तौरात) में बदलाव करते थे और कहते थे कि यह अल्लाह की बात है, ताकि लोग धोखा खाएं और उन्हें फायदा हो।
दीन को बेचकर दुनियावी फायदा उठाना:
वे लोग अल्लाह की आयतों को बदलकर दुनिया का थोड़ा सा फायदा लेना चाहते थे। यह हराम और निंदनीय काम है।
झूठी कमाई और इल्म का गलत इस्तेमाल:
ऐसे लोगों की कमाई भी हराम होती है और जो कुछ वे लिखते हैं, वह गुमराही फैलाता है। यह आयत चेतावनी देती है कि अल्लाह की किताब में अपनी तरफ़ से बातें जोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है।
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सूरह अल-बक़रा आयत 79 तफ़सीर